तिब्बत पर्वतमाला में मिले आदिमानव के जीवाश्म से यह साबित हुआ है कि मानवजाति हमारी पहले की सोच से कहीं अधिक समय पहले से ऊंचाई वाले स्थानों पर जीवन बसर करने की आदि थी| वैज्ञानिकों ने बुधवार को यह जानकारी दी|

 

 

 

 

 

तकरीबन 1,60,000 वर्ष पुराना यह जबड़ा दक्षिणी साइबेरिया के बाहरी इलाके में पाये गये अपनी तरह के पहले डेनिसोवन मानव प्रजाति से जुड़ा है| विशेषज्ञों का मानना है कि यह इस बात को समझने में अहम साबित होगा कि आज के आधुनिक समय की मानवजाति ने कम ऑक्सीजन की परिस्थिति में भी जीवन जीने की अनुकूलता अपने अंदर कैसे विकसित की|

 

 

डेनिसोवन्स या डेनिसोवा होमिनिंस एक विलुप्त प्रजाति या जीनस होमो में पुरातन मनुष्यों की उप प्रजाति है| वर्तमान में अस्थायी प्रजातियों या उप प्रजाति को होमो डेनिसोवा, होमो अल्टेंसेंसिस, होमो सेपियन्स डेनिसोवा या होमो एसपी के नाम से जाना जाता है|

 

 

 

निएंडरथल के समकालीन और उनके जैसी मानवजाति की जगह संभवत: आज के आधुनिक होमो सेपियन्स प्रजाति ने ले ली है| डेनिसोवन्स का अस्तित्व सबसे पहले करीब एक दशक पहले प्रकाश में आया|

 

 

 

 

निएंडरथल मानव होमो वंश का एक विलुप्त सदस्य है| जर्मनी में निएंडर की घाटी में इस आदिमानव की कुछ हड्डियां मिली है, इसलिए इसे निएंडरथल मानव का नाम दिया गया है|इसका कद अन्य मानवजातियों की अपेक्षा छोटा था| यह पश्चिम यूरोप, पश्चिम एशिया तथा अफ्रीका में रहता था और अब से लगभग 1,60,000 वर्ष पूर्व यह अस्तित्व में था|

 

 

 

 

 

दक्षिणी साइबेरिया के अल्टाई पहाड़ियों से मिले एक मानव ऊंगली के अवशेष से डेनिसोवन्स की मौजूदगी की पुष्टि हुई|यह मानव ऊंगली करीब 80,000 साल पुरानी थी|

 

 

 

हालांकि नये मानव अवशेष से अनुसंधानकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि डेनिसोवन्स की तादाद कहीं अधिक थी और वे कहीं अधिक प्राचीन हैं| इस मानव अवशेष की खोज करीब 30 साल पहले एक स्थानीय साधु ने की थी|

 

 

 

 

मैक्स प्लैंक इंसटीट्यूट के मानव विकास विभाग के निदेशक जीन-जैक्स हुब्लिन ने कहा, ‘‘तिब्बत पर्वतीय क्षेत्र में करीब 1,60,000 वर्ष पहले 3,300 मीटर की ऊंचाई पर मानवजातियों की मौजूदगी भले ही थोड़ा प्राचीन हो लेकिन यह कुछ ऐसा है जिसकी आजतक कोई कल्पना नहीं कर सकता था|’’

 

 

 

 

यह अवशेष शियहे में बैशिया कार्स्ट गुफा में बरामद हुआ, जिसे उस साधु ने स्थानीय संग्रहालय को सौंप दिया. यह इतना पुरातन है कि इससे कोई डीएनए प्राप्त नहीं किया जा सका|

 

 

 

 

 

लेकिन हुबलिन और उनकी टीम ने इस जबड़े के एक दांत पर आधुनिक प्रोटीन विश्लेषण का इस्तेमाल कर इसे आनुवंशिक रूप से साइबेरिया में पाये गये डेनिसोवन प्रजातियों से जोड़ा|

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